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अभिलाषा चौहान

अभिलाषा चौहान

अभिलाषा चौहान हिंदी साहित्य की समर्पित और सक्रिय रचनाकार हैं। उनका जन्म ग्वालियर (मध्य प्रदेश) में हुआ तथा वर्तमान में वे जयपुर (राजस्थान) में निवास करती हैं। स्वभाव से साहित्य-प्रेमी अभिलाषा जी हिंदी भाषा और साहित्य की सेवा को अपने जीवन का उद्देश्य मानती हैं। उनका लेखन संवेदनशीलता, संस्कार और रचनात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण है।

शिक्षा

अभिलाषा चौहान ने हिंदी साहित्य में एम.ए. तथा एम.फिल. की उपाधि प्राप्त की है, जिससे उनके लेखन में अकादमिक गंभीरता और साहित्यिक परिपक्वता स्पष्ट रूप से दिखाई देती है।

सम्प्रति

वर्तमान में वे हिंदी ब्लॉगिंग तथा प्रतियोगी परीक्षाओं हेतु पुस्तकों के लेखन में सक्रिय रूप से संलग्न हैं। वे साहित्य को समाज से जोड़ने और पाठकों तक सरल एवं प्रभावी भाषा में विचार पहुँचाने का कार्य कर रही हैं।

लेखन-क्षेत्र

अभिलाषा चौहान पद्य और गद्य—दोनों विधाओं में समान रूप से लेखन करती हैं। वे छंदमुक्त एवं छंदबद्ध काव्य, हाइकु, सेदोका, ताँका जैसी जापानी काव्य विधाओं के साथ-साथ कहानी, लघुकथा, आलेख आदि गद्य विधाओं में भी सृजन करती हैं। उनकी रचनाओं में भावनात्मक गहराई, सामाजिक चेतना और साहित्यिक सौंदर्य का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है।

प्रकाशित पुस्तकें

उनकी प्रकाशित कृतियों में “ये कुण्डलियाँ बोलती हैं” (साझा संग्रह), “श्रमिक की व्यथा” (साझा संग्रह), “माँ” (साझा संग्रह, साहित्य पीडिया से), “गीत गूँजते हैं”, “हाइकु शतक संग्रह”, “नवगीत संग्रह”, “काव्य प्रभा”, “कहानियाँ”, “अनुभूति” (साझा संग्रह), “कह मुकरी”, “जीवन के मूलमंत्र”, “काव्य-सुमन संग्रह” आदि प्रमुख हैं।

सम्मान व उपलब्धियाँ

अभिलाषा चौहान को उनके साहित्यिक योगदान के लिए अनेक सम्मान प्राप्त हुए हैं, जिनमें कुण्डलियाँ शतक वीर सम्मान, दोहा विशारद सम्मान (अर्णव कलश एसोसिएशन, ‘कलम की सुगंध’ से), टॉप टेन ब्लॉगर सम्मान, जन कवि सम्मान (आई ब्लॉगर व द साहित्य से) सहित विभिन्न साहित्यिक समूहों से प्राप्त अनेक सम्मान-पत्र शामिल हैं।

अन्य साहित्यिक गतिविधियाँ

उनकी रचनाएँ वर्तमान अंकुर, विजय दर्पण, अमर उजाला जैसी पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं। इसके अतिरिक्त स्टोरीमिरर और हिंदी प्रतिलिपि जैसे डिजिटल मंचों पर भी उनकी रचनाएँ प्रकाशित एवं पुरस्कृत हुई हैं।

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कविताएँ