दम्पति / सुमित्रानंदन पंत
पार्वती की शादी छुटपन में हो गई थी। वह गाँव की लड़की थी। पिता खेती-बारी का काम देखते थे। जात के ब्राह्मण थे, थोड़ी सी ज़मीन थी, स्वयं खेती का...
read more >>पार्वती की शादी छुटपन में हो गई थी। वह गाँव की लड़की थी। पिता खेती-बारी का काम देखते थे। जात के ब्राह्मण थे, थोड़ी सी ज़मीन थी, स्वयं खेती का...
read more >>कितनी दूरियों से कितनी बार कितनी डगमग नावों में बैठ कर मैं तुम्हारी ओर आया हूँ ओ मेरी छोटी-सी ज्योति! कभी कुहासे में तुम्हें न देखता भी पर कुहासे की...
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