कष्ट से उबार दे
कष्ट से उबार दे! संवार दे मां भारती!
देह रोष में जले, टले न रण का सवाल,
कपाल-भाल पर तिलक रूप रौद्र है विशाल।
सजल नयन,व्यथित मन, बह रहे हैं अश्रुधार,
रार हैं कई प्रकार अधीर सार में विचार।।
कृतज्ञ राष्ट्र के जनों को, तार दे मां भारती,
कष्ट से उबार दे, संवार दे मां भारती।।
धधक – धधक अगन -मगन लौ उठे गगन तक,
सजग रंग, कुरंग -सा प्रतीत आयुधन तक।
शान है प्रखर,प्रबल शौर्य सूर्य प्रताप है,
कौन मरे मिटे आज, व्यर्थ ही संताप है।
बे रंग न रहूं कहीं, निखार दे मां भारती!
कष्ट से उबार दे, संवार दे मां भारती।।
कठिन काल थाल सजी,अस्त्र – शस्त्र संवाद को,
मिटे हैं यौवन कितने, हैं मिटा रहे विवाद को।
जय विजय,अजर अमर,अडिग शौर्यवान है,
भारती का लाल वह वसुधा की शान है।।
हो राष्ट्र का भला अब प्रसार दे मां भारती,
कष्ट से उबार दे,संवार दे मां भारती।।
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